आप जानते है भारत के दो लोग बहुत पॉपुलर थे और वो कौन थे ?

 

आपको पता है भारत से दो लोग रूस में बहुत पॉपुलर थे। एक थे नेहरू और दूसरा राजकपूर। राज कपूर का फेमस होना इसलिए था कि वो भी नेहरू की तरह ही एक घोर वामपन्थी था। आपने अक्सर देखा होगा कि रूस में राजकपूर की फिल्में और गाने बड़े फेमस हुए हैं। लेकिन उसका कारण राज कपूर का कोई कालजयी फ़िल्म बना डालना नही था बल्कि वो इकोसिस्टम था जिसका वो हिस्सा था। रूस जो "हाफ ग्लास वाटर" थ्योरी को दुनिया मे फैला उनकी संस्कृति खत्म करने में लगा था उसमें राज कपूर भारत मे उसका सबसे बड़ा एजेंट था।

हाफ ग्लास थ्योरी वही थी जिसे आज "फ्री सेक्स" कहा जाता है। अर्थात महिला को इतना चरित्रहीन कर दो कि वो यहां वहां हमबिस्तर होती रहे और उसे इसमे कुछ गलत न लग ये आधुनिकता लगे। यही काम रूस अमेरिका से लेकर भारत हर जगह कर रहा था।

दुनिया को गलतफहमी है कि अमेरिका कोल्ड वॉर जीता लेकिन हकीकत ये है कि रूस का तो कुछ क्षेत्रफल गया लेकिन रूस ने अमेरिका का सारा कल्चर ही वामपन्थी बना दिया। उसकी हॉलीवुड में वो गंदगी भरी गयी कि पूरा अमेरिकी समाज आज परिवारमुक्त हो गया है। यही काम राज कपूर जैसे बॉलीवुड के माध्यम से कर रहे थे। आज भी हो रहा है।

सोचिये न कि कितना गन्ध राज कपूर के अंदर था कि अपनी माँ के साथ नहाते हुए वो उसके यौनांग निहारता था और उन्हें महसूस कर कर आसक्त होता था। यही चीज तो फिर उसने फिल्मों के माध्यम से दिखाया जहां मेरा नाम जोकर (शायद यही फ़िल्म) में छोटा ऋषि कपूर, सिमी अग्रवाल को नहाते हुए देखता है। जीनत अमान से लेकर मंदाकिनी जैसों को न्यूड कराया जाता है। बहुत सी अन्य फिल्मों में भी इस तरह के नग्न चित्रण किसी भक्ति से लेकर मातृत्व के नाम पर डाल दिये गए।

यही वो दौर था जहां पर्दे पर ये सब हो रहा था और पीठ पीछे उसी तरह की अश्लील पार्टियां चल रही थी जिन्हें आज रेव पार्टी कहते हैं जहां नशा और सेक्स खुलकर परोसा जाता है। आप अक्सर सुनते होंगे कि बॉलीवुड में तो पत्नी एक्सचेंज का रिवाज भी है... तो ये कल्चर एकाएक नही बना।

बॉलीवुड के शुरुआत जहां कोई लड़की भांड नही बनना चाहती थी वहां सबसे पहले वेश्याओं से काम शुरू किया गया। फिर इस इंडस्ट्री को मशहूर और आकर्षक बना आम घर की लड़कियों को यहां जाने को प्रेरित कराया गया। फिर धीरे धीरे ऑडिशन के नाम पर इनका कास्टिंग काउच हुआ। (गूगल में आपको तस्वीरे मिल जाएंगी जहां उस दौर में लड़की को अंतवस्त्र में खड़ा किया है फ़िगर चेक करने को)।

धीरे धीरे फिर वही हुआ जो आज आपको टिकटोक से दिखता है। जैसे टिकटोक पर लड़कियां समझ गयी कि पुट्ठे दिखाने फॉलोवर बढाने का शॉर्टकट है वैसे ही तब बॉलीवुड एक शोहरत और पैसा बनाने का शॉर्टकट बन गया था, फिर क्या हो गया जो पर्दे के पीछे समझौते करने थे?

लड़की सोचती थी कि पर्दे पर तो एक सुंदर हीरोइन दिख रही हूँ। हर कोई मेरे दीवाने हैं। लड़कियां मुझ जैसा बनना चाहती हैं। पुरुष मुझसे शादी करने के सपने देखता है। जहां जाती हूँ भीड़ ठहर जाती है मेरे दीदार को। ये सब की चाहत ने घर घर मे सपने पनपा दिए कि मैं भी तो सुंदर हूँ... मैं भी हीरोइन बनूंगी। तो कर लेंगे पर्दे के पीछे के समझौते।

शुरुआत में सारे अय्याशी अश्लीलता के काम पर्दे के पीछे इसलिए थे क्योंकि पर्दे पर अश्लीलता देखने को अधिकतर समाज तैयार नही था लेकिन धीरे धीरे भाँडो ने एक एक पत्थर चला समाज की गहराई नापनी शुरू की। नतीजा ये हुआ कि "साला मैं तो साहब बन गया" पर जिस समाज मे बवाल हो गया था कि साला कैसे बोल दिया गाने में, वो धीरे धीरे कर भाग डीके बोस तक बना दिया गया।

ऐसे ही जहां रोमांस के नाम पर पेड़ के इर्द गिर्द घुमा जाता था। किसिंग के नाम पर दो फूल मिलते थे। वहां राज कपूर से शुरू हुआ... आज इस कदर बन चुका है कि खुलकर न्यूडिटी चलती है। धक्के वाले शॉट्स तक दिखाए जाते हैं सेक्स सीन के नाम पर वो भी पूरे साउंड इफेक्ट (moaning) के साथ। और क्या कहा जाता है कि रचनात्मकता है। ये सीन डालना जरूरी था। जैसे पुरानी फिल्में बिना इन सीन के तो अधूरी ही रह जाती थी... लोग कहानी समझ ही नही पाते थे।

इसलिए आज जो बॉलीवुड की हकीकत है जहां सेक्स, ड्रग्स, वैश्यावृत्ति सब चलती है... वो सब इस राज कपूर की देन है। लोग कहते भी हैं कि ये इतना श्याना था कि इसने इन सब चीजों से अपने घर की महिलाएं दूर रखी... इसके परिवार में पहले तो किसी की शादी फिल्मी हीरोइन से नही होती थी लेकिन हो गयी तो ये उससे भी फ़िल्म छुड़वा देता था... लेकिन दूसरों की लड़कियों का इसने जो शोषण किया था उसी की हाय इसे ऐसी लगी कि फिर इसकी पोतियां आज तैमूर पैदा कर रही हैं। कल्पना कीजिये जिस खानदान में नाम पृथ्वीराज के नाम पर पड़ते थे, उस खानदान से आज तैमूर और जहांगीर जैसे निकल रहे हैं। ये इसको लगा श्राप ही है।

आज इसका पूरा खानदान कमजोर हो चुका है। एक समय जिनका सिक्का बॉलीवुड में चलता था, आज वहां कपूर खानदान के नाम पर गिने चुने बचे हैं जिनमे से बड़ा एक्टर या डायरेक्टर है ही कौन? बस रणबीर कपूर जैसे तैसे चल रहा है जिसका भी करियर सलमान खान ने खराब कर दिया था कटरीना के चक्कर मे।

आज बॉलीवुड में D गैंग की चलती है जो तेजी से इसका इस्लामीकरण कर रहा है। राज कपूर ने इसका वामीकरण किया था। नतीजा आज इसके अंदर सिर्फ ये दो प्रजाति के लोग हैं और अगर यहां काम करना है तो इनके शर्तो पर करना होगा। एक आपसे शरीर बिक़वायेगा तो दूसरा आपसे या अल्ला, या खुदा बिक़वायेगा। इसीलिए कथित राष्ट्रवादी भी भले ही कितना भारत भारत करते रहें लेकिन इन मामलों में उनका स्टैंड बाकी के भाँडो जैसा ही होता है।

अगर मना करोगे तो आप वहां काम ही नही कर पाओगे और हो सकता है आपका सुशांत भी बना दिया जाए और फिर ये लोग आपको कहें कि आप मानसिक रूप से बच्चे थे... वहां की पॉलिटिक्स नही झेल पाए।


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