मिट रहे गुलामी के निशां, बदले कानून, कायदे और पहचान

 

नई दिल्ली. देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। लेकिन शासन-प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में अंग्रेजों के जमाने की रवायतें हमें आज भी गुलामी के दौर का अहसास कराती हैं |प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले वर्ष 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से दासता की ऐसी ही निशानियों को मिटाने का आह्वान किया था। पिछले 9 वर्ष में सरकार ने ऐसे ही नियम-कानून और प्रतीकों को हटा देश का गौरव लौटाया है।

163 साल पुराने कानूनों की जगह नए कानून

मानसून सत्र में गृहमंत्री अमित शाह ने 163 साल पुराने 3 मूलभूत कानूनों में बदलाव का बिल लोकसभा में पेश किया। तीनों बिलों को अभी संसदीय समिति के पास भेजा जाएगा। इसके बाद इन्हें दोनों सदनों से पास करवाया जाएगा। इससे पहले मोदी सरकार • अप्रासंगिक हो चुके 1500 से ज्यादा पुराने कानून खत्म कर चुकी है।

96 साल पुरानी संसद की जगह नया भवन

सबसे बड़ा बदलाव संसद भवन को लेकर किया गया। 96 साल पुराने संसद भवन की जगह नया भवन बनकर तैयार है। मौजूदा संसद की आधारशिला 12 फरवरी 1921 को द इयूक ऑफ कनाट ने रखी थी। 18 जनवरी 1927 को तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन ने उद्घाटन किया।

नौसेना को मिला नया ध्वज

2 सितंबर 2022 को नौसेना के • ध्वज से गुलामी के प्रतीक को हटाया। और नए ध्वज में लाल रंग के सेंट जॉर्ज क्रॉस को हटाकर उसकी जगह छत्रपति शिवाजी महाराज की शाही मोहर से प्रेरित चिह्न लगाया गया है। और उसके बाईं ओर तिरंगा बना है। दाहिनी ओर नीले रंग की पृष्ठभूमि वाले एक अष्टकोण में सुनहरे रंग का राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चिह्न बना है। जो नौसेना की सान बढ़ाता है।

इंडिया गेट पर नेताजी की प्रतिमा

इंडिया गेट के ग्रैंड कैनोपी में ग्रेनाइट से बनी 28 फीट • ऊंची नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगाई गई। कभी यहां जॉर्ज पंचम प्रतिमा की प्रतिमा लगी थी।


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