सुप्रीम कोर्ट: डीएलएड वाले ही बन सकेंगे प्राथमिक शिक्षक

 

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केवल डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त ही प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक बनने के योग्य माने जाएंगे। शीर्ष न्यायालय के इस फैसले के बाद बीएड डिग्रीधारियों के लिए मुश्किलें पैदा हो गई हैं। उनके लिए प्राथमिक शिक्षक बनने का रास्ता लगभग बंद हो गया। 2014 प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) के एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश अभिजीत गांगुली ने बीएड को भी प्राथमिक शिक्षक के लिए आवेदन करने की छूट दी थी। इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई। डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त का कहना था कि बीएड डिग्रीधारी माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक बन सकते हैं। यदि बीएड डिग्रीधारी प्राथमिक शिक्षक बनने लगे तो उनके अवसर कम हो जाएंगे। राजस्थान समेत अन्य राज्यों ने भी एनसीटीई की 2018 की विज्ञप्ति को चुनौती दी थी। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश अनिरुद्ध बोस की फैसले को सही ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा था कि बीएड किए हुए अभ्यर्थी वर्ग 1-5 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेने के योग्य नहीं हैं। 

एनसीटीई ने दी थी छूट: 2018 में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने एक विज्ञप्ति जारी कर बीएड डिग्रीधारियों को भी प्राथमिक शिक्षक बनने की छूट दी थी। इसके लिए 6 माह का अतिरिक्त ब्रिज कोर्स करना पड़ता था। ब्रिज कोर्स आम तौर पर हाई स्कूल करने वाले छात्र करते हैं। इससे उनके कॉलेज के इंजीनियरिंग या नर्सिंग जैसे विषयों में कोर्स को शुरू करने से पहले आवश्यक तैयारी होती है।

बीएड डिग्रीधारी अब नहीं बन सकेंगे प्राथमिक शिक्षक 

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि बीएड डिग्री के आधार पर प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक नियुक्त नहीं हो सकते। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार और एनसीटीई की अपील को खारिज करते हुए यह फैसला दिया। 

         कोर्ट ने राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा 30 मई, 2018 को जारी अधिसूचना को भी रद्द कर दिया। उस अधिसूचना के तहत प्राथमिक स्कूलों में लेवल 1 (पांचवीं कक्षा ) शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बीएड डिग्री धारकों को भी योग्य माना था। एनसीटीई ने इस अधिसूचना में बीएड डिग्री धारक को प्राथमिक शिक्षक योग्य माना था, लेकिन कहा था कि नियुक्ति के छह माह के भीतर ऐसे शिक्षकों को एक ब्रिज कोर्स करना होगा। एनसीटीई की अधिसूचना को राजस्थान उच्च न्यायालय ने रद्द करते हुए कहा था कि बीएड डिग्री धारक प्राथमिक शिक्षक नहीं बन सकते। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। इस फैसले का असर न सिर्फ बिहार के शिक्षकों की नियुक्ति पर नही बल्कि उसके साथ देश के सभी राज्यों में पड़ेगा।

5वीं कक्षा के नीचे तक पढ़ाने के लिए सिर्फ बीएसटीसी डिग्रीधारी ही मान्य मानेजाएंगे।

उच्चतम न्यायालय ने माना कि प्राथमिक शिक्षक यानी 5वीं कक्षा के नीचे तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए बीएड डिग्री धारक योग्य नहीं होंगे। प्राथमिक शिक्षक के लिए सिर्फ बेसिक स्कूल टीचिंग से सर्टिफिकेट (बीएसटीसी) लेना परेगा यानी डीएलएड समकक्ष वाले ही योग्य माने जाएंगे।

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